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कुम्भ मेला · The Festival of the Nectar Pot

जहां अमृत गिरा,
वहां मानवता एकत्र होती है।

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति ।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥

"हे गंगे, यमुने, गोदावरि, सरस्वति, नर्मदे, सिन्धु, कावेरि — इस जल में उपस्थित हों।"

कुंभ मेला पृथ्वी पर सबसे बड़ा शांतिपूर्ण समागम है — मानवता की एक ऐसी नदी जो उन चार पवित्र नगरों की ओर बहती है जहाँ अमरता के अमृत की बूँदें गिरी थीं। अब तीन महान कुंभ समीप आ रहे हैं: हरिद्वार 2027, नासिक-त्र्यंबकेश्वर 2027 और उज्जैन 2028

Haridwar Ardh Kumbh begins — Makar Sankranti, 14 Jan 2027
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हरिद्वार अर्ध कुंभ 2027 — प्रत्येक पवित्र स्नान तिथि

हर की पौड़ी पर माँ गंगा के तट पर, जहाँ अमृत की पहली बूँद गिरी थी। 14 जनवरी – 20 अप्रैल 2027. उत्तराखंड सरकार ने आधिकारिक तौर पर शाही स्नान को अमृत स्नान — यानी अमृत स्नान — नाम दिया है।

तिथि · 2027पवित्र अवसरमहत्व
14 Januaryमकर संक्रांति प्रारंभिक स्नानसूर्य का मकर राशि में प्रवेश — मेला प्रारंभ; कुंभ का प्रथम पवित्र स्नान
6 Februaryमौनी अमावस्या पर्व स्नानमौन अमावस्या — सर्वाधिक प्रभावशाली स्नान दिवसों में से एक
11 Februaryवसंत पंचमी पर्व स्नानवसंत का आगमन; माँ सरस्वती की पूजा
20 Februaryमाघ पूर्णिमा पर्व स्नानमाघ पूर्णिमा — मासभर चलने वाले कल्पवास का समापन
6 मार्चमहाशिवरात्रि अमृत स्नानशिव की महान रात्रि — प्रथम शाही अमृत स्नान, हर की पौड़ी की ओर अखाड़ों की शोभायात्रा
8 मार्चसोमवती अमावस्या अमृत स्नानदुर्लभ सोमवती अमावस्या — द्वितीय शाही अमृत स्नान
14 अप्रैलमेष संक्रांति · वैशाखी अमृत स्नानसूर्य का मेष राशि में प्रवेश — हरिद्वार कुंभ का मुख्य अमृत स्नान
20 अप्रैलचैत्र पूर्णिमा समापन स्नानपूर्णिमा की विदाई — अर्ध कुंभ का समापन

संपूर्ण हरिद्वार 2027 तीर्थयात्रा मार्गदर्शिका →

The Sacred Triad Ahead

तीन कुंभ। तीन नदियाँ। एक अमृत।

First · 2027
14 Jan → 20 Apr 2027

हरिद्वार अर्ध कुंभ 2027

हरि का द्वार, जहाँ गंगा हिमालय को छोड़ती हैं और अमृत ने पहली बार ब्रह्मकुंड पर पृथ्वी को स्पर्श किया था। तीन अमृत स्नान: महाशिवरात्रि, सोमवती अमावस्या और मेष संक्रांति।

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Flag Hoisted · 2026–28
Amrit Snans · Aug–Sep 2027

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ

गोदावरी तट पर — दक्षिण गंगा — जहाँ कुंभ नासिक के रामकुंड और ब्रह्मगिरि के नीचे गोदावरी के उद्गम स्थल, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित कुशावर्त कुंड के बीच प्रवाहित होता है।

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2028
27 Mar → 27 May 2028

उज्जैन सिंहस्थ 2028

जब गुरु सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब अमृत क्षिप्रा को उद्वेलित करता है। महाकाल की अपनी नगरी — अवंतिका, जो सात मोक्ष-पुरियों में से एक है — में सिंहस्थ करोड़ों श्रद्धालुओं को स्वयं काल की कृपा में स्नान कराता है।

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अमृतस्य पुत्राः · Children of Immortality

कुंभ का महत्व

जब देवों और असुरों ने क्षीर सागर का मंथन किया, तब अमृत का एक कुंभ — एक कलश — प्रकट हुआ। इसके पश्चात संघर्ष के बारह दिव्य दिनों (मनुष्य के बारह वर्ष) में पृथ्वी पर चार स्थानों पर अमृत की बूँदें गिरीं। प्रत्येक स्थान पर, जब ग्रह उस क्षण के योग में पुनः आते हैं, तब माना जाता है कि नदियाँ पुनः अमृत बनकर प्रवाहित होती हैं।

~4अमृत की पवित्र नगरियाँ
12वर्षीय गुरु चक्र तिथियां निर्धारित करता है
660M+प्रयागराज महाकुंभ 2025 में आने वाले तीर्थयात्री
2017यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत
Sacred Knowledge

पुराणों की कथाएँ एवं तीर्थयात्री ज्ञान

समुद्र मंथन

क्षीर सागर का मंथन — अमृत के कुंभ के उद्भव की पूरी पौराणिक कथा, और चार नगर कैसे शाश्वत बने।

Read the story

अमृत स्नान

अमृत स्नान का वास्तविक अर्थ क्या है — शाही स्नान के पीछे का शास्त्र, अखाड़ों का क्रम, और मन का आंतरिक स्नान।

Understand the Snan

नागा साधु और अखाड़े

प्रत्येक अमृत स्नान की अगुवाई करने वाले योद्धा-संन्यासी — तेरह अखाड़े, आदि शंकराचार्य से उनकी उत्पत्ति और उनके व्रत।

Meet the Akharas

कुंभ का खगोल विज्ञान

सूर्य और चंद्र को साक्षी मानकर गुरु की राशियों में बारह वर्षों की यात्रा किस प्रकार प्रत्येक कुंभ के नगर और तिथियों को निर्धारित करती है।

Decode the sky
Questions Pilgrims Ask

कुंभ मेला — त्वरित उत्तर

अगला कुंभ मेला कब है?

अगला हरिद्वार अर्ध कुंभ, 14 जनवरी – 20 अप्रैल 2027 है — इसके बाद नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ (मुख्य अमृत स्नान अगस्त–सितंबर 2027) और उज्जैन सिंहस्थ (27 मार्च – 27 मई 2028) आयोजित होगा।

हरिद्वार 2027 के लिए अमृत स्नान की तिथियां क्या हैं?

6 मार्च (महाशिवरात्रि), 8 मार्च (सोमवती अमावस्या) और 14 अप्रैल 2027 (मेष संक्रांति / बैसाखी) — साथ ही 14 जनवरी, 6 फरवरी, 11 फरवरी, 20 फरवरी और 20 अप्रैल 2027 को पर्व स्नान हैं।

कुंभ के चार स्थान कौन से हैं?

प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक-त्र्यंबकेश्वर और उज्जैन — जहाँ समुद्र मंथन के दौरान अमृत की चार बूंदें गिरी थीं।

प्रत्येक 12 वर्ष में क्यों?

गुरु (बृहस्पति) लगभग 12 वर्षों में राशि चक्र की परिक्रमा करता है; प्रत्येक शहर का कुंभ तब लौटता है जब गुरु उस शहर के अमृत-पतन की राशि में पुनः प्रवेश करता है — संपूर्ण खगोल विज्ञान यहाँ देखें

सम्पूर्ण दर्शन · Explore Everything

कुंभ में समाहित सब कुछ — बस एक स्पर्श दूर

ज्ञान, पवित्र समय, आवास, सत्संग और जीवंत परंपरा — कुंभ मेला गुरू का हर द्वार, यहीं पर।

🌌 सभी अमृत स्नान

ज्योतिषीय रूप से सत्यापित आकाश के साथ प्रत्येक पावन स्नान दिवस — साथ ही चारों कुंभ नगरों के लिए आज का सजीव पंचांग।

स्नान के दिन देखें →

🚩 13 अखाड़े

आदि शंकराचार्य ने धर्म के संप्रदायों — शैव, वैष्णव और उदासीन दलों को कैसे संगठित किया, और मेले में उनकी भूमिका।

अखाड़ों को समझें →

🙏 महान संत

अखाड़ों के जीवंत सिद्ध पुरुष — आचार्य, महामंडलेश्वर और आज के परंपरा-धारक, अखाड़ा-दर-अखाड़ा।

सिद्ध पुरुषों से मिलें →

🛏 आश्रम प्रवास

वास्तविक कमरों और बिस्तरों वाले सत्यापित आश्रम — निःशुल्क सेवा या सशुल्क, बुकिंग से पहले हर शर्त प्रदर्शित।

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🎪 सत्संग एवं कार्यक्रम

सत्संगों, पाठ्यक्रमों और आयोजनों के लिए निःशुल्क पंजीकरण करें — आपका QR प्रवेश पास तुरंत प्राप्त होगा।

कार्यक्रम देखें →

🕉 सूक्ष्म पंचांग

मुहूर्त, होरा, कालम और व्रत-पर्व — दिन की संपूर्ण पवित्र काल-गणना, हमारे अपने इंजन से।

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🗺 कुंभ मानचित्र

चारों पवित्र नगरों के घाट, मंदिर, स्टेशन और शिविर — पहुँचने से पहले अपना मार्ग जानें।

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🧠 ब्रह्मा AI

कुंभ के बारे में कुछ भी पूछें — तिथियां, यात्रा, अनुष्ठान, प्रवास — सत्यापित ज्ञान से उत्तर पाएं।

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📖 पावन कथाएं

समुद्र मंथन, अमृत स्नान का अर्थ, नागा साधु — मेले के पीछे का गहरा 'क्यों'।

कथाएं पढ़ें →

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